महात्मा बुद्ध
बिन सतगुरु भेंते मुक्ती न कोय,
बिन सतगुरु भेंते महादुख पयि।
इस शाश्वत संदेश में, श्री नानक जी ने स्पष्ट किया है कि एक जीवित गुरु (वक्र गुरु) की शरण में जाए बिना न तो जीव को मोक्ष की प्राप्ति होगी और न ही उसके अहंकार का नाश होगा, जो एक जीव को ईश्वर से दूर रखता है। सतगुरु की सेवा के बिना अर्थात् सतगुरु की शरण में जाने से कोई धार्मिक प्रथा सफल नहीं हो सकती। गुरु जी की शरण के बिना,नाम प्राप्त नहीं किया जा सकता है। नाम के बिना मोक्ष संभव नहीं है। भगवान कबीर साहेब कहते हैं कि गुरु के बिना मोक्ष नहीं मिल सकता। बिना गुरु कोई पार न पावै